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करणकरण

करण एक तिथि का आधा भाग है — चूँकि एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं और प्रत्येक दो करणों में बँटती है, इसलिए प्रति माह 60 करण होते हैं, जो 11 नामित करणों के चक्र में चलते हैं (जिनमें से 7 दोहराए जाते हैं, 4 महीने में केवल एक बार आते हैं)।

व्यवहार में

करणों का अपना शुभ/अशुभ स्वभाव होता है, जिसे परंपरागत रूप से मुहूर्त चयन को सूक्ष्मता से समायोजित करने के लिए तिथि के साथ उपयोग किया जाता है — कौन-सा करण किस गतिविधि के लिए उपयुक्त है, इसका पूर्ण विवरण एक त्वरित-संदर्भ शब्दावली प्रविष्टि से परे है।

गणना कैसे होती है

प्रत्येक करण ठीक आधी तिथि तक चलता है (लगभग 9–13 घंटे, तिथि जैसे ही परिवर्तनशील-अवधि तर्क का पालन करते हुए)।

11 करण

कुल 11 करण होते हैं। 7 "चर" (दोहराए जाने वाले) हैं — ये चंद्र मास में चक्र बनाते हैं: बव, बालव, कौलव, तैतिल, गरज, वणिज, विष्टि (जिसे भद्रा भी कहते हैं)। 4 "स्थिर" हैं — ये प्रत्येक मास में केवल एक बार विशेष स्थानों पर आते हैं: किंस्तुघ्न (शुक्ल पक्ष का प्रारंभ), शकुनि, चतुष्पाद, नाग (कृष्ण पक्ष का अंत)। यह ऐप ठीक इसी योजना का उपयोग करता है।

विष्टि (भद्रा) — ध्यान देने योग्य

7 चर करणों में से विष्टि (भद्रा) सबसे अधिक देखा जाने वाला अशुभ करण है — परंपरागत रूप से नया काम शुरू करने, यात्रा या समारोहों के लिए इससे बचा जाता है। बाकी (बव, बालव, कौलव, तैतिल, गरज, वणिज) सामान्यतः तटस्थ से शुभ माने जाते हैं, जिनमें बव और बालव महत्वपूर्ण शुरुआत के लिए सबसे अनुकूल हैं।