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उपाय (रत्न, मंत्र, दान)उपाय

ये पारंपरिक वैदिक उपाय हैं — रत्न, मंत्र और दान — जो 9 ग्रहों में से प्रत्येक से जुड़े होते हैं, और उन ग्रहों के लिए सुझाए जाते हैं जो आपकी कुंडली में कमजोर या पीड़ित पाए जाते हैं (कम षड्बल, अस्त होना, प्रतिकूल वक्री स्थिति, या सक्रिय कठिन दशा के माध्यम से)।

व्यवहार में

प्रत्येक ग्रह के उपाय समूह में एक विशेष रत्न (अनुशंसित धातु, उंगली, वजन और पहनने के दिन के साथ), एक मंत्र (सुझाई गई जाप संख्या और दिन के साथ), और दान के लिए विशेष वस्तुएँ शामिल हैं — यह बृहत् पराशर होरा शास्त्र, लाल किताब और जातक पारिजात सहित शास्त्रीय स्रोतों से लिया गया है।

गणना कैसे होती है

किसी ग्रह को उपाय की आवश्यकता के रूप में चिह्नित किया जाता है यह कम षड्बल स्कोर, अस्त होना, प्रतिकूल वक्री गति, या वर्तमान कठिन दशा अवधि का स्वामी होने के संयोजन के आधार पर — फिर विशेष रत्न/मंत्र/दान समूह एक निश्चित शास्त्रीय प्रति-ग्रह तालिका से निकाला जाता है।

रत्न उपायों में वास्तविक वित्तीय और, दुर्लभ मामलों में, शारीरिक जोखिम शामिल होते हैं — यह प्रविष्टि शास्त्रीय अवधारणा को ईमानदारी से समझाती है, लेकिन किसी अपरिचित रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श का विकल्प नहीं है।