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सप्तम भाव स्वामी
यह वह ग्रह है जो आपकी जन्म कुंडली के सप्तम भाव का स्वामी है — शास्त्रीय रूप से यह विवाह, साझेदारी और जीवनसाथी का भाव है — इस ग्रह की दशा अवधि और गोचर विवाह के समय के लिए विशेष महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
व्यवहार में
आपके सप्तम स्वामी द्वारा शासित दशा या अंतर्दशा अवधि (या उससे जुड़ा कोई गोचर) परंपरागत रूप से संभावित विवाह अवधि का सबसे मजबूत संकेतक माना जाता है।
गणना कैसे होती है
यह इस आधार पर तय होता है कि आपके लग्न से सप्तम भाव में कौन-सी राशि पड़ती है (होल-साइन भाव पद्धति) और उस राशि का शास्त्रीय स्वामी ग्रह कौन-सा है।
संबंधित शब्द
विवाह साहम् →