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वारवार

वार का सीधा अर्थ है सप्ताह का दिन — लेकिन वैदिक ज्योतिष में, सप्ताह के प्रत्येक दिन का एक विशेष स्वामी ग्रह होता है, और उस ग्रह के गुण पूरे दिन को रंगते हैं।

व्यवहार में

प्रत्येक वार अपने स्वामी ग्रह का सामान्य स्वभाव रखता है: रविवार (सूर्य) अधिकार एवं सरकारी कार्यों के लिए अनुकूल; सोमवार (चंद्र) भावनात्मक एवं घरेलू मामलों के लिए; मंगलवार (मंगल) साहस एवं संपत्ति के लिए; बुधवार (बुध) व्यापार एवं संवाद के लिए; गुरुवार (गुरु) पूजा एवं शिक्षा के लिए; शुक्रवार (शुक्र) प्रेम, कला एवं विलासिता के लिए; शनिवार (शनि) श्रम एवं दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं के लिए अनुकूल है। यह एक व्यापक पृष्ठभूमि है, कठोर नियम नहीं — विशेष निर्णयों के लिए दिन की तिथि, नक्षत्र और समय-खंड अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।

गणना कैसे होती है

यहाँ वार "वैदिक दिन" है, जो मध्यरात्रि-से-मध्यरात्रि के बजाय सूर्योदय-से-सूर्योदय तक चलता है। यदि आप सूर्योदय से पहले पंचांग देखते हैं, तो आपको अभी भी कल का वार और तिथि दिखाई जाएगी, क्योंकि पारंपरिक दिन अभी बदला नहीं है।